जयप्रकाश नारायण ने मार्च, 1971 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी को एक पत्र लिखा था, 'दलों की फूट का भी काफी अनुभव है. मुझे इन सारे अनुभवों के आधार पर मैं यह कहने की धृष्टता करता हूं कि जब भी किसी दल में फूट पड़ती है, तो दोनों तरफ से नेताओं का दावा यही होता है कि झगड़ा सिद्धांत और नीति का है. कोई नहीं कहता कि झगड़ा व्यक्तिगत सत्ता या पद का है. हर फूट में थोड़ा बहुत विचार भेद तो होता ही है यद्यपि सब उसे बढ़ा चढ़ाकर पेश करते हैं लेकिन उसमें नेतृत्व पद का झगड़ा भी कम नहीं होता.
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मंत्रीजी, होम क्वरंटाइन में घुमे जा रहे हैं
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