आज कल लोग पत्रकारों पर ऊँगली उठाने लगे हैं। इसके पीछे की वजह जानने की जरुरत है की आख़िर ऐसा क्यो हो रहा है। निजी चैनलो की पर्तिस्पर्धा मे बेचारे पत्रकार पीस रहें हैं। इस आपाधापी मे जरुरत की खबरें छुट रही है। यह मनमानी पत्रकारों की नही है आखिरकार वो भी आदमी हैं उन्हें भी परिवार के लिए धन कहिये
Friday, June 13, 2008
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मंत्रीजी, होम क्वरंटाइन में घुमे जा रहे हैं
बतौर केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री कोरोनाकाल में अश्वनी चैबे की जिम्मेवारियां काफी बढ जानी चाहिए। क्योंकि आम लोग उनकी हरेक गतिविधियों खासक...
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प्रीति सिंह (3 मिनट में पढ़ें) फिल्म 'नदिया के पार' के आखिरी लम्हे, कमरे में गूंजा और चंदन. भींगी पलकों के साथ दोनों के बीच संव...
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नानी-दादी से कहानी सुनते-सुनते स्वप्न लोक में खो जाना. बीच-बीच में उत्सुकता बस कुछ-कुछ पूछना. सोने से पहले का वैसा सुखद आनंद अबके बच्च...
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